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श्लोक 7.140.25  |
ततोऽर्जुनो हर्षमवाप संख्ये
कृष्णश्च दृष्ट्वा पुरुषप्रवीरम्॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय युद्धभूमि में उपस्थित पुरुषों में श्रेष्ठ सात्यकि को देखकर श्रीकृष्ण और अर्जुन बहुत प्रसन्न हुए। |
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| At that time Shri Krishna and Arjun were very happy to see Satyaki, the chief among men, present on the battlefield. 25. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि अलम्बुषवधे चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें अलम्बुषवधविषयक एक सौ चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४०॥
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