श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 140: सात्यकिद्वारा राजा अलम्बुषका और दु:शासनके घोड़ोंका वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.140.1 
धृतराष्ट्र उवाच
अहन्यहनि मे दीप्तं यश: पतति संजय।
हता मे बहवो योधा मन्ये कालस्य पर्ययम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय! मेरा यश दिन-प्रतिदिन क्षीण होता जा रहा है। मेरे अनेक योद्धा मारे जा चुके हैं। मुझे लगता है कि यह समय की मार है।"
 
Dhritarashtra said, 'Sanjay! My glory is diminishing day by day. Many of my warriors have been killed. I think this is just a function of time.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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