श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.14.9 
अमर्षवेगप्रभवां क्रव्यादगणसंकुलाम्।
बलौघै: सर्वत: पूर्णां ध्वजवृक्षापहारिणीम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह नदी क्रोध के वेग से उत्पन्न हुई थी। वह मांसभक्षी पशुओं से घिरी हुई थी। वह चारों ओर से सेना के वेग से भरी हुई थी और ध्वजारूपी वृक्षों को तोड़-तोड़कर बहा ले जा रही थी।॥9॥
 
That river was born out of a surge of anger. It was surrounded by carnivorous animals. It was filled from all sides with the flow of an army and was breaking and carrying away the trees in the form of flags.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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