श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  7.14.87 
तेषां च प्रियमन्विच्छन् सूतस्य च पराभवम्।
आर्तायनिरमित्रघ्न: क्रुद्ध: सौभद्रमभ्ययात्॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
अपने सारथि को मारा गया देखकर कौरवों को प्रसन्न करने की इच्छा रखने वाले शत्रुघ्न शल्य ने क्रोधित होकर पुनः सुभद्रापुत्र पर आक्रमण किया।87
 
Seeing his charioteer killed, Shatrughan Shalya, who wanted to please the Kauravas, became enraged and again attacked Subhadra's son. 87
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि अभिमन्युपराक्रमे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें अभिमन्युका पराक्रमविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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