श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 83-84h
 
 
श्लोक  7.14.83-84h 
ततो विराटद्रुपदौ धृष्टकेतुर्युधिष्ठिर:।
सात्यकि: केकया भीमो धृष्टद्युम्नशिखण्डिनौ॥ ८३॥
यमौ च द्रौपदेयाश्च साधु साध्विति चुक्रुशु:।
 
 
अनुवाद
यह देखकर विराट, द्रुपद, धृष्टकेतु, युधिष्ठिर, सात्यकि, केकयराजकुमार, भीमसेन, धृष्टद्युम्न, शिखंडी, नकुल, सहदेव और द्रौपदी के पांचों पुत्र 'साधु, साधु' (बहुत अच्छा, बहुत अच्छा) कहकर चिल्लाने लगे।
 
Seeing this, Virata, Drupada, Dhrishtaketu, Yudhishthira, Satyaki, the prince of Kekaya, Bhimasena, Dhrishtadyumna, Shikhandi, Nakula, Sahadeva and the five sons of Draupadi started clamouring, saying, 'Sadhu, Sadhu' (very good, very good).
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas