श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  7.14.81 
ततस्तामेव शल्यस्य सौभद्र: परवीरहा।
मुमोच भुजवीर्येण वैदूर्यविकृतां शिताम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
उस समय शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सुभद्राकुमार ने अपनी बाहुओं के बल से शल्य पर वैदूर्य माणिक्य से बनी हुई वही तीक्ष्ण धार वाली शक्ति का प्रयोग किया ॥81॥
 
At that time, Subhadrakumar, who had killed the enemy warriors, used the same sharp-edged power made of Vaidurya Ruby on Shalya with the strength of his arms. 81॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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