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mahabharat 7.14.79: जिस प्रकार गरुड़ उड़ते हुए सर्प को पकड़ लेते हैं, उसी प्रकार अभिमन्यु ने उछलकर उस शक्ति को पकड़ लिया और म्यान से अपनी तलवार खींच ली।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  7.14.79 
तामवप्लुत्य जग्राह विकोशं चाकरोदसिम्।
वैनतेयो यथा कार्ष्णि: पतन्तमुरगोत्तमम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार गरुड़ उड़ते हुए सर्प को पकड़ लेते हैं, उसी प्रकार अभिमन्यु ने उछलकर उस शक्ति को पकड़ लिया और म्यान से अपनी तलवार खींच ली।
 
Just as Garuda catches a flying serpent, Abhimanyu leapt and caught hold of that Shakti and drew his sword from the sheath.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)