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श्लोक  7.14.74 
भग्नमाज्ञाय निस्त्रिंशमवप्लुत्य पदानि षट्।
अदृश्यत निमेषेण स्वरथं पुनरास्थित:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि उसकी तलवार टूट गई है, जयद्रथ छह कदम उछला और पलक झपकते ही वह पुनः अपने रथ पर बैठा हुआ दिखाई दिया।
 
Knowing that his sword was broken, Jayadratha jumped six steps and in the blink of an eye he was again seen sitting on his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)