श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.14.72 
ततो विक्षिपत: खड्गं सौभद्रस्य यशस्विन:।
शरावरणपक्षान्ते प्रजहार जयद्रथ:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
इसी समय जयद्रथ ने तलवार चलाकर सुभद्रा के प्रतापी पुत्र की ढाल पर प्रहार किया।
 
At this very moment Jayadratha, wielding his sword, struck the shield of the illustrious son of Subhadra. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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