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श्लोक  7.14.71 
बाह्यमाभ्यन्तरं चैव चरन्तौ मार्गमुत्तमम्।
ददृशाते महात्मानौ सपक्षाविव पर्वतौ॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों महाहृदयी योद्धा अपनी उत्तम रणनीति को बदलकर बाहर और भीतर से आक्रमण करते हुए दो पंख वाले पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Those two great-hearted warriors, changing their excellent tactics to attack from outside and inside, appeared like two winged mountains. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)