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श्लोक  7.14.56 
तदुत्सृज्य धनुश्छिन्नं सौभद्र: परवीरहा।
उद्‍बबर्ह सितं खड्गमाददान: शरावरम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
तब शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सुभद्रापुत्र ने टूटा हुआ धनुष फेंक दिया, चमकती हुई तलवार खींच ली और ढाल हाथ में ले ली।
 
Then the son of Subhadra, that slayer of enemy warriors, threw away the broken bow, drew the gleaming sword and took the shield in his hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)