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श्लोक  7.14.50 
तत: प्रचलिताश्वेन विधिवत्कल्पितेन च।
रथेनाभ्यपतद् राजन् सौभद्रं पौरवो नदन्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, राजा पौरव ने, विधिपूर्वक सुसज्जित तथा चंचल घोड़ों से जुते हुए रथ पर आरूढ़ होकर, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु पर गरजते हुए आक्रमण किया।
 
Thereafter, King Paurava, mounted on a chariot drawn by playful horses and decorated as per rituals, roaringly attacked Abhimanyu, the son of Subhadra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)