श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.14.43 
युद्धं योधवरौ लोके सौमदत्तिशिखण्डिनौ।
भूतानां त्रासजननं चक्रातेऽस्त्रविशारदौ॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भूरिश्रवा और शिखण्डी - ये दोनों ही संसार के श्रेष्ठ योद्धा और अस्त्रविद्या में निपुण थे। दोनों ने ऐसा युद्ध किया कि समस्त भूत भयभीत हो गए ॥43॥
 
Bhurishrava and Shikhandi – both of them were the world's best warriors and experts in weaponry. Both of them fought a war that terrified all the ghosts. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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