Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.14.4: तीक्ष्ण बुद्धि वाले द्रोणाचार्य के छोड़े हुए भयंकर बाण पाण्डव सेना के रथियों, घुड़सवारों, हाथियों, घोड़ों और पैदल योद्धाओं को धूल में मिला रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.14.4 
रथिन: सादिनश्चैव नागानश्वान् पदातिन:।
रौद्रा हस्तवता मुक्ता: सम्मृद्नन्ति स्म सायका:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तीक्ष्ण बुद्धि वाले द्रोणाचार्य के छोड़े हुए भयंकर बाण पाण्डव सेना के रथियों, घुड़सवारों, हाथियों, घोड़ों और पैदल योद्धाओं को धूल में मिला रहे थे।
 
The fierce arrows shot by the swift-witted Dronacharya were reducing the charioteers, horse-riders, elephants, horses and foot-fighters of the Pandava army to dust. 4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)