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mahabharat 7.14.36: तब भोजवंशी कृतवर्मा ने तुरन्त ही सात्यकि को सतहत्तर तीखे बाणों से घायल कर दिया, किन्तु वे उसे हिला न सके, जैसे तेज हवा पर्वत को नहीं हिला सकती।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.14.36 
तं भोज: सप्तसप्तत्या विद्‍ध्वाऽऽशु निशितै: शरै:।
नाकम्पयत शैनेयं शीघ्रो वायुरिवाचलम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तब भोजवंशी कृतवर्मा ने तुरन्त ही सात्यकि को सतहत्तर तीखे बाणों से घायल कर दिया, किन्तु वे उसे हिला न सके, जैसे तेज हवा पर्वत को नहीं हिला सकती।
 
Then Kritavarman of the Bhoja dynasty immediately pierced Satyaki with seventy-seven sharp arrows, but he could not shake him like a strong wind cannot shake a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)