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mahabharat 7.14.28: महाराज! तब विविंशतनि ने भी सहसा आक्रमण करके भीमसेन का घोड़ा, ध्वजा और धनुष काट डाला; यह देखकर सारी सेना ने उसकी बहुत प्रशंसा की।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.14.28 
विविंशतिस्तु सहसा व्यश्वकेतुशरासनम्।
भीमं चक्रे महाराज तत: सैन्यान्यपूजयन्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब विविंशतनि ने भी सहसा आक्रमण करके भीमसेन का घोड़ा, ध्वजा और धनुष काट डाला; यह देखकर सारी सेना ने उसकी बहुत प्रशंसा की।
 
Maharaj! Then Vivinshatani also suddenly attacked and cut off Bhimasena's horse, flag and bow; seeing this the whole army praised him very much.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)