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mahabharat 7.14.27: वीर भीमसेन बीस तीखे बाणों से विविंशति को घायल करके भी उसे विचलित न कर सके, यह आश्चर्य की बात थी॥27॥   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.14.27 
विविंशतिं भीमसेनो विंशत्या निशितै: शरै:।
विद्‍ध्वा नाकम्पयद् वीरस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वीर भीमसेन बीस तीखे बाणों से विविंशति को घायल करके भी उसे विचलित न कर सके, यह आश्चर्य की बात थी॥27॥
 
The brave Bhimasena could not disturb Vivinshati even after wounding him with twenty sharp arrows. This was an astonishing thing.॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)