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mahabharat 7.14.25: महाराज! उस समय वे दोनों महाबली योद्धा रथहीन होकर हाथों में गदाएँ लेकर युद्धभूमि में इस प्रकार क्रीड़ा करने लगे, मानो ऊँचे शिखरों वाले दो पर्वत आपस में टकरा रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.14.25 
ततस्तौ विरथौ राजन् गदाहस्तौ महाबलौ।
चिक्रीडतू रणे शूरौ सशृङ्गाविव पर्वतौ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस समय वे दोनों महाबली योद्धा रथहीन होकर हाथों में गदाएँ लेकर युद्धभूमि में इस प्रकार क्रीड़ा करने लगे, मानो ऊँचे शिखरों वाले दो पर्वत आपस में टकरा रहे हों।
 
Maharaj! At that time both those mighty warriors, without chariots, took maces in their hands and started playing in the battle-field as if two mountains with high peaks were colliding with each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)