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mahabharat 7.14.2: वहाँ प्रकट हुए स्वर्णमय रथ वाले द्रोणाचार्य को क्रोध में भरकर और साक्षात अग्निदेव के समान सम्पूर्ण सेना को जलाते हुए देखकर समस्त सृंजय योद्धा काँप उठे॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.14.2 
निर्दहन्तमनीकानि साक्षादग्निमिवोत्थितम्।
दृष्ट्वा रुक्मरथं क्रुद्धं समकम्पन्त सृञ्जया:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वहाँ प्रकट हुए स्वर्णमय रथ वाले द्रोणाचार्य को क्रोध में भरकर और साक्षात अग्निदेव के समान सम्पूर्ण सेना को जलाते हुए देखकर समस्त सृंजय योद्धा काँप उठे॥2॥
 
All the Srinjay warriors trembled after seeing Drona with the golden chariot appearing there, filled with anger and burning the entire army like the fire god in person. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)