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mahabharat 7.14.11: चर्बी, मज्जा और हड्डियाँ वहाँ रेत के ढेर की तरह दिखाई दे रही थीं। पगड़ियों का समूह उसमें झाग की तरह दिखाई दे रहा था। युद्ध का बादल उस नदी को रक्त की वर्षा से भर रहा था। वह नदी शिकार की तरह मछलियों से भरी हुई थी।   |   mahabharat अध्याय 7.14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.14.11 
मेदोमज्जास्थिसिकतामुष्णीषचयफेनिलाम्।
संग्रामजलदापूर्णां प्रासमत्स्यसमाकुलाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
चर्बी, मज्जा और हड्डियाँ वहाँ रेत के ढेर की तरह दिखाई दे रही थीं। पगड़ियों का समूह उसमें झाग की तरह दिखाई दे रहा था। युद्ध का बादल उस नदी को रक्त की वर्षा से भर रहा था। वह नदी शिकार की तरह मछलियों से भरी हुई थी।
 
Fat, marrow and bones appeared like sand piles there. The group of turbans appeared like foam in it. The cloud of war was filling that river with a rain of blood. That river was full of fishes like prey.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)