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mahabharat 7.139.93: जैसे ही धनुष ने उसे स्पर्श किया, वह क्रोधित सर्प की तरह फुंफकार उठा और कर्ण के हाथ से धनुष छीनकर उसके सिर पर प्रहार कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  7.139.93 
धनुषा स्पृष्टमात्रेण क्रुद्ध: सर्प इव श्वसन्।
आच्छिद्य स धनुस्तस्य कर्णं मूर्धन्यताडयत्॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही धनुष ने उसे स्पर्श किया, वह क्रोधित सर्प की तरह फुंफकार उठा और कर्ण के हाथ से धनुष छीनकर उसके सिर पर प्रहार कर दिया।
 
As soon as the bow touched him he hissed like an enraged serpent and snatched the bow from Karna's hand and struck it on his head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)