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mahabharat 7.139.89-90: अब भीमसेन ने अपनी मुट्ठी में अंगूठा डालकर वज्र के समान अत्यन्त भयंकर घूँसा मारकर सारथिपुत्र कर्ण को मार डालना चाहा। किन्तु क्षण भर में ही उन्हें अर्जुन का स्मरण हो आया। अतः सव्यसाची अर्जुन द्वारा पूर्व में दी गई प्रतिज्ञा का पालन करते हुए पाण्डवपुत्र भीमसेन ने समर्थ एवं शक्तिशाली होते हुए भी उस समय कर्ण को नहीं मारा।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 89-90
 
 
श्लोक  7.139.89-90 
भीमोऽपि मुष्टिमुद्यम्य वज्रगर्भां सुदारुणाम्।
हन्तुमैच्छत् सूतपुत्रं संस्मरन्नर्जुनं क्षणात्॥ ८९॥
शक्तोऽपि नावधीत् कर्णं समर्थ: पाडुनन्दन:।
रक्षमाण: प्रतिज्ञां तां या कृता सव्यसाचिना॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
अब भीमसेन ने अपनी मुट्ठी में अंगूठा डालकर वज्र के समान अत्यन्त भयंकर घूँसा मारकर सारथिपुत्र कर्ण को मार डालना चाहा। किन्तु क्षण भर में ही उन्हें अर्जुन का स्मरण हो आया। अतः सव्यसाची अर्जुन द्वारा पूर्व में दी गई प्रतिज्ञा का पालन करते हुए पाण्डवपुत्र भीमसेन ने समर्थ एवं शक्तिशाली होते हुए भी उस समय कर्ण को नहीं मारा।
 
Now Bhimasena, putting his thumb inside his fist, wanted to kill the son of a charioteer, Karna, by drawing a very fierce punch like a thunderbolt. But in a moment he remembered Arjuna. So, keeping the promise made earlier by Savyasachi Arjuna, Pandava's son Bhima, despite being capable and powerful, did not kill Karna at that time. 89-90.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)