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mahabharat 7.139.84: ऐसा महसूस करते हुए कि मानो हाथियों का समूह किसी रथ के हमले से बचने के लिए किले में घुस आया है, पांडु पुत्र भीम केवल अपनी जान बचाना चाहते थे और उन्होंने राधा पुत्र कर्ण पर हमला नहीं किया।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  7.139.84 
हस्तिनां व्रजमासाद्य रथदुर्गं प्रविश्य च।
पाण्डवो जीविताकाङ्क्षी राधेयं नाभ्यहारयत्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
ऐसा महसूस करते हुए कि मानो हाथियों का समूह किसी रथ के हमले से बचने के लिए किले में घुस आया है, पांडु पुत्र भीम केवल अपनी जान बचाना चाहते थे और उन्होंने राधा पुत्र कर्ण पर हमला नहीं किया।
 
Feeling as if the group of elephants had entered the fort to escape from a chariot attack, Pandu's son Bhima only wanted to save his life and did not attack Radha's son Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)