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mahabharat 7.139.82-83: जब कुन्तीपुत्र भीमसेन के सब अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो गये, उनके पास एक भी अस्त्र नहीं बचा और कर्ण पहले की भाँति उन पर प्रहार करता रहा, तब अर्जुन द्वारा मारे हुए पर्वत के समान हाथियों को रथ का मार्ग रोकने के लिए पड़े देखकर वह उनके भीतर घुस गया। 82-83।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 82-83
 
 
श्लोक  7.139.82-83 
क्षीणशस्त्रस्तु कौन्तेय: कर्णेन समभिद्रुत:॥ ८२॥
दृष्ट्वार्जुनहतान् नागान् पतितान् पर्वतोपमान्।
रथमार्गविघातार्थं व्यायुध: प्रविवेश ह॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीपुत्र भीमसेन के सब अस्त्र-शस्त्र नष्ट हो गये, उनके पास एक भी अस्त्र नहीं बचा और कर्ण पहले की भाँति उन पर प्रहार करता रहा, तब अर्जुन द्वारा मारे हुए पर्वत के समान हाथियों को रथ का मार्ग रोकने के लिए पड़े देखकर वह उनके भीतर घुस गया। 82-83।
 
When all the weapons of Kunti's son Bhimasena were destroyed, not a single weapon was left with him and Karna continued to attack him as before, then seeing the mountain-like elephants killed by Arjun lying there to block the path of the chariot, he entered inside them. 82-83.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)