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mahabharat 7.139.74-75h: कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों से घायल होकर महाबली भीमसेन उसे पकड़ने के लिए आकाश में उछले, जिससे कर्ण के हृदय में पीड़ा हुई।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 74-75h
 
 
श्लोक  7.139.74-75h 
स वध्यमानो बलवान् कर्णचापच्युतै: शरै:॥ ७४॥
वैहायसं प्राक्रमद् वै कर्णस्य व्यथयन्मन:।
 
 
अनुवाद
कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों से घायल होकर महाबली भीमसेन उसे पकड़ने के लिए आकाश में उछले, जिससे कर्ण के हृदय में पीड़ा हुई।
 
The mighty Bhimasena, being wounded by the arrows shot from Karna's bow, leapt into the sky to catch him, causing pain to Karna's heart. 74 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)