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mahabharat 7.139.61: तब पाण्डु नन्दन भीम ने पुनः भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ की; किन्तु कर्ण ने निर्भय होकर उन समस्त अस्त्रों को अवशोषित कर लिया ॥61॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.139.61 
पुनश्चासृजदुग्राणि शरवर्षाणि पाण्डव:।
तस्य तान्याददे कर्ण: सर्वाण्यस्त्राण्यभीतवत्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तब पाण्डु नन्दन भीम ने पुनः भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ की; किन्तु कर्ण ने निर्भय होकर उन समस्त अस्त्रों को अवशोषित कर लिया ॥61॥
 
Then Pandu Nandan Bhima again started raining terrible arrows; But Karna fearlessly absorbed all those weapons. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)