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mahabharat 7.139.54: राजन! एक दूसरे को मारने की इच्छा रखने वाले सभी योद्धा कर्ण और भीमसेन का पराक्रम देखने के लिए युद्ध से विमुख हो गए ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.139.54 
योधा व्युपारमन् युद्धाद् दिदृक्षन्त: पराक्रमम्।
कर्णपाण्डवयो राजन् परस्परवधैषिणो:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
राजन! एक दूसरे को मारने की इच्छा रखने वाले सभी योद्धा कर्ण और भीमसेन का पराक्रम देखने के लिए युद्ध से विमुख हो गए ॥ 54॥
 
King! All the warriors, who wanted to kill each other, turned away from the battle in order to see the valour of Karna and Bhimasena. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)