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mahabharat 7.139.51-52h: तब क्रोध और क्षोभ से भरे हुए बलवान भीमसेन ने भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, मानो अग्निदेव जलाना चाहते हों।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  7.139.51-52h 
पुनश्चासृजदुग्राणि शरवर्षाणि पाण्डव:॥ ५१॥
अमर्षी बलवान् क्रुद्धो दिधक्षन्निव पावक:।
 
 
अनुवाद
तब क्रोध और क्षोभ से भरे हुए बलवान भीमसेन ने भयंकर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, मानो अग्निदेव जलाना चाहते हों।
 
Then the powerful Bhimasena, filled with anger and resentment, began a shower of fierce arrows like the fire god wishing to burn. 51 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)