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mahabharat 7.139.46-47h: सूतपुत्र कर्ण भीमसेन को नाना प्रकार के बाणों से आच्छादित करके उन पर आक्रमण कर रहा था, और उस महाहृदयी योद्धा के पराक्रम का अपमान कर रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  7.139.46-47h 
स भीमं छादयन् बाणै: सूतपुत्र: पृथग्विधै:॥ ४६॥
उपारोहदनादृत्य तस्य वीर्यं महात्मन:।
 
 
अनुवाद
सूतपुत्र कर्ण भीमसेन को नाना प्रकार के बाणों से आच्छादित करके उन पर आक्रमण कर रहा था, और उस महाहृदयी योद्धा के पराक्रम का अपमान कर रहा था।
 
Suta's son Karna, covering Bhimasena with various kinds of arrows, came upon him, insulting the valour of that great-hearted warrior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)