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mahabharat 7.139.45-46h: उस समय न तो सूर्य दिखाई देता था, न वायु चलती थी। बाणों के समूह से आच्छादित आकाश में कुछ भी दिखाई नहीं देता था।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.139.45-46h 
न स्म सूर्यस्तदा भाति न स्म वाति समीरण:॥ ४५॥
शरजालावृते व्योम्नि न प्राज्ञायत किंचन।
 
 
अनुवाद
उस समय न तो सूर्य दिखाई देता था, न वायु चलती थी। बाणों के समूह से आच्छादित आकाश में कुछ भी दिखाई नहीं देता था।
 
At that time neither the sun could be seen nor the wind could blow. Nothing could be seen in the sky covered with a group of arrows. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)