Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.139.44-45h: कर्ण और भीमसेन दोनों के बाण स्पर्श करने पर अग्नि की चिनगारियों के समान प्रतीत हो रहे थे। उनका वेग युद्ध में अनायास ही सर्वत्र व्याप्त था। सारा आकाश उन स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से आच्छादित था।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.139.44-45h 
कर्णस्य शरजालौघैर्भीमसेनस्य चोभयो:।
अग्निस्फुलिङ्गसंस्पर्शैरञ्जोगतिभिराहवे॥ ४४॥
तैस्तै: कनकपुङ्खानां द्यौरासीत् संवृता व्रजै:।
 
 
अनुवाद
कर्ण और भीमसेन दोनों के बाण स्पर्श करने पर अग्नि की चिनगारियों के समान प्रतीत हो रहे थे। उनका वेग युद्ध में अनायास ही सर्वत्र व्याप्त था। सारा आकाश उन स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से आच्छादित था।
 
The arrows of both Karna and Bhimsen looked like sparks of fire when touched. His speed was everywhere in the battle without any effort. The whole sky was covered with those arrows having golden wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)