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mahabharat 7.139.43: उस समय आकाश में फैला हुआ बाणों का जाल भीमसेन के बाणों से घायल होकर टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गया।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.139.43 
ततो व्योम्नि विषक्तानि शरजालानि भागश:।
आहतानि व्यशीर्यन्त भीमसेनस्य पत्रिभि:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय आकाश में फैला हुआ बाणों का जाल भीमसेन के बाणों से घायल होकर टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर गया।
 
At that time, the net of arrows spread across the sky broke into pieces and scattered after being struck by Bhimasena's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)