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mahabharat 7.139.35-36h: कर्ण के छोड़े हुए हजारों स्वर्ण बाण आकाश में टिड्डियों के समान चमक रहे थे। 35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.139.35-36h 
ते व्योम्नि रुक्मविकृता व्यकाशन्त सहस्रश:॥ ३५॥
शलभानामिव व्राता: शरा: कर्णसमीरिता:।
 
 
अनुवाद
कर्ण के छोड़े हुए हजारों स्वर्ण बाण आकाश में टिड्डियों के समान चमक रहे थे। 35 1/2॥
 
Thousands of golden arrows fired by Karna were shining like locusts in the sky. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)