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mahabharat 7.139.34-35h: धनुष की शक्ति से छूटे हुए वे सुवर्णमय बाण भीमसेन के रथ पर निरंतर गिर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.139.34-35h 
ते तु चापबलोद्‍धूता: शातकुम्भविभूषिता:॥ ३४॥
अजस्रमपतन् बाणा भीमसेनरथं प्रति।
 
 
अनुवाद
धनुष की शक्ति से छूटे हुए वे सुवर्णमय बाण भीमसेन के रथ पर निरंतर गिर रहे थे।
 
Those golden arrows, raised from the force of the bow, were continuously falling on Bhimasena's chariot. 34 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)