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mahabharat 7.139.31-32h: तत्पश्चात् धनुष से छूटे हुए, अंकुशयुक्त गांठों और सुनहरे पंखों वाले बहुत-से बाण आकाश में दिखाई देने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.139.31-32h 
तत: कनकपुङ्खानां शराणां नतपर्वणाम्॥ ३१॥
धनुश्च्युतानां वियति ददृशे बहुधा व्रज:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धनुष से छूटे हुए, अंकुशयुक्त गांठों और सुनहरे पंखों वाले बहुत-से बाण आकाश में दिखाई देने लगे।
 
Thereafter, a large number of arrows with hooked knots and golden feathers released from the bow became visible in the sky. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)