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mahabharat 7.139.30-31h: महाराज! कर्ण के धनुष से छूटे हुए स्वर्ण पंखयुक्त अत्यन्त तीक्ष्ण बाणों ने समस्त दिशाओं को तथा सूर्य की प्रभा को भी ढक लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.139.30-31h 
स्वर्णपुङ्खा: सुनिशिता: कर्णचापच्युता: शरा:॥ ३०॥
प्राच्छादयन्महाराज दिश: सूर्यस्य च प्रभा:।
 
 
अनुवाद
महाराज! कर्ण के धनुष से छूटे हुए स्वर्ण पंखयुक्त अत्यन्त तीक्ष्ण बाणों ने समस्त दिशाओं को तथा सूर्य की प्रभा को भी ढक लिया।
 
Maharaj! The extremely sharp arrows with golden feathers shot from Karna's bow covered all directions and even the radiance of the Sun. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)