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mahabharat 7.139.27-28h: महाराज! अधिरथपुत्र कर्ण का भयंकर शरीर सैकड़ों बाणों से आच्छादित था। वह अपनी किरणों से चमकते हुए सूर्य के समान शोभायमान था।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.139.27-28h 
मरीचिविकचस्येव राजन् भानुमतो वपु:॥ २७॥
आसीदाधिरथेर्घोरं वपु: शरशताचितम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! अधिरथपुत्र कर्ण का भयंकर शरीर सैकड़ों बाणों से आच्छादित था। वह अपनी किरणों से चमकते हुए सूर्य के समान शोभायमान था।
 
King! The fearsome body of Adhirath's son Karna was covered with hundreds of arrows. He looked like the Sun shining with its rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)