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mahabharat 7.139.25-26h: उस समय राधानन्दन कर्ण क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपने विशाल स्वर्ण-मंडित धनुष को टंकारते हुए भयंकर दृष्टि से भयंकर भीमसेन की ओर देखा।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.139.25-26h 
स विस्फार्य महच्चापं कार्तस्वरविभूषितम्॥ २५॥
भीमं प्रैक्षत राधेयो घोरं घोरेण चक्षुषा।
 
 
अनुवाद
उस समय राधानन्दन कर्ण क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपने विशाल स्वर्ण-मंडित धनुष को टंकारते हुए भयंकर दृष्टि से भयंकर भीमसेन की ओर देखा।
 
At that time Radhanandana Karna became enraged and while twanging his huge gold-decorated bow, he looked with a fierce gaze at the fearsome Bhimasena. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)