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mahabharat 7.139.23-25h: ऐसा होते हुए भी कर्ण दूसरे धनुष को हाथ में लेकर अर्ध-फुसफुसाकर उठ खड़ा हुआ। कुरु, सौवीर तथा सिन्धुदेश के योद्धाओं की सेना का विनाश, सर्वत्र गिरे हुए कवच, ध्वजाओं और शस्त्रों से आच्छादित भूमि तथा सर्वत्र निर्जीव हाथी, घोड़े और सारथिओं के शरीर देखकर सूतपुत्र कर्ण का शरीर क्रोध से व्याकुल हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  7.139.23-25h 
निमेषार्धात् तत: कर्णो धनुर्हस्तो व्यतिष्ठत।
दृष्ट्वा स कुरुसौवीरसिन्धुवीरबलक्षयम्॥ २३॥
सवर्मध्वजशस्त्रैश्च पतितै: संवृतां महीम्।
हस्त्यश्वरथदेहांश्च गतासून् प्रेक्ष्य सर्वश:॥ २४॥
सूतपुत्रस्य संरम्भाद् दीप्तं वपुरजायत।
 
 
अनुवाद
ऐसा होते हुए भी कर्ण दूसरे धनुष को हाथ में लेकर अर्ध-फुसफुसाकर उठ खड़ा हुआ। कुरु, सौवीर तथा सिन्धुदेश के योद्धाओं की सेना का विनाश, सर्वत्र गिरे हुए कवच, ध्वजाओं और शस्त्रों से आच्छादित भूमि तथा सर्वत्र निर्जीव हाथी, घोड़े और सारथिओं के शरीर देखकर सूतपुत्र कर्ण का शरीर क्रोध से व्याकुल हो उठा।
 
Despite this, Karna stood up with the second bow in his hand in half a whisper. Seeing the destruction of the army of Kuru, Sauveera and the warriors of Sindhudesh, the land covered with fallen armour, flags and weapons everywhere and the bodies of lifeless elephants, horses and charioteers everywhere, the body of Suta's son Karna became agitated with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)