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mahabharat 7.139.2: महाबाहु भीमसेन को सारथिपुत्र द्वारा छेद दिए जाने पर भी उन्हें कोई पीड़ा नहीं हुई, जैसे पर्वत को छेद दिया गया हो ॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.139.2 
वध्यमानो महाबाहु: सूूतपुत्रेण पाण्डव:।
न विव्यथे भीमसेनो भिद्यमान इवाचल:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु भीमसेन को सारथिपुत्र द्वारा छेद दिए जाने पर भी उन्हें कोई पीड़ा नहीं हुई, जैसे पर्वत को छेद दिया गया हो ॥2॥
 
Even though the mighty-armed Bhimasena was pierced by the son of a charioteer, he did not feel any pain, just as a mountain was pierced. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)