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mahabharat 7.139.13: तब युद्धस्थल में कर्ण की वीरता को न मानकर और उसकी उपेक्षा करके पाण्डुपुत्र भीमसेन उस पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.139.13 
तत: प्रासृजदुग्राणि शरवर्षाणि पाण्डव:।
समरे तमनादृत्य तस्य वीर्यमचिन्तयन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तब युद्धस्थल में कर्ण की वीरता को न मानकर और उसकी उपेक्षा करके पाण्डुपुत्र भीमसेन उस पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगे॥13॥
 
Then, not considering Karna's bravery in the battlefield and disregarding him, Bhimsen, the son of Pandu, started raining fierce arrows on him. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)