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mahabharat 7.139.121-122h: तत्पश्चात् पराक्रमी कुन्तीकुमार अर्जुन ने रणभूमि में गर्जना करते हुए अपने गाण्डीव धनुष की गम्भीर ध्वनि से सुवर्णमय पृष्ठ वाले समस्त धनुषों के सम्मिलित शब्दों को दबा दिया। 121 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 121-122h
 
 
श्लोक  7.139.121-122h 
तत: सुवर्णपृष्ठानां चापानां कूजतां रणे॥ १२१॥
शब्दं गाण्डीवघोषेण कौन्तेयोऽभ्यभवद् बली।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी कुन्तीकुमार अर्जुन ने रणभूमि में गर्जना करते हुए अपने गाण्डीव धनुष की गम्भीर ध्वनि से सुवर्णमय पृष्ठ वाले समस्त धनुषों के सम्मिलित शब्दों को दबा दिया। 121 1/2॥
 
Then the mighty Kuntikumar Arjuna, while thundering in the battlefield, drowned out the combined words of all the bows with golden backs with the solemn sound of his Gandiva bow. 121 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)