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mahabharat 7.139.115-116h: इधर, पुरुषों में श्रेष्ठ भीमसेन भी सात्यकि के रथ पर आरूढ़ होकर युद्धस्थल में सव्यसाची पाण्डु के पुत्र भाई अर्जुन के पास पहुँचे ॥115 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 115-116h
 
 
श्लोक  7.139.115-116h 
भीमोऽपि सात्यकेर्वाहं समारुह्य नरर्षभ:॥ ११५॥
अन्वयाद् भ्रातरं संख्ये पाण्डवं सव्यसाचिनम्।
 
 
अनुवाद
इधर, पुरुषों में श्रेष्ठ भीमसेन भी सात्यकि के रथ पर आरूढ़ होकर युद्धस्थल में सव्यसाची पाण्डु के पुत्र भाई अर्जुन के पास पहुँचे ॥115 1/2॥
 
Here, Bhimsen, the best of men, also mounted on Satyaki's chariot, reached brother Arjun, son of Savyasachi Pandu, in the battlefield. 115 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)