Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.139.110-112h: राजन! इस प्रकार जब कर्ण ने भीमसेन को रथहीन कर दिया और वृष्णिवंशी सिंह भगवान श्रीकृष्ण तथा महापुरुष अर्जुन के सामने अपनी बहुत प्रशंसा की, तब श्रीकृष्ण की प्रेरणा से कपिध्वज अर्जुन ने शिला पर छुपे हुए बहुत से बाण सूतपुत्र कर्ण पर छोड़े। 110-111 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 110-112h
 
 
श्लोक  7.139.110-112h 
एवं तं विरथं कृत्वा कर्णो राजन् व्यकत्थयत्॥ ११०॥
प्रमुखे वृष्णिसिंहस्य पार्थस्य च महात्मन:।
ततो राजन् शिलाधौतान् शरान् शाखामृगध्वज:॥ १११॥
प्राहिणोत् सूतपुत्राय केशवेन प्रचोदित:।
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार जब कर्ण ने भीमसेन को रथहीन कर दिया और वृष्णिवंशी सिंह भगवान श्रीकृष्ण तथा महापुरुष अर्जुन के सामने अपनी बहुत प्रशंसा की, तब श्रीकृष्ण की प्रेरणा से कपिध्वज अर्जुन ने शिला पर छुपे हुए बहुत से बाण सूतपुत्र कर्ण पर छोड़े। 110-111 1/2॥
 
Rajan! In this way, when Karna made Bhimasena chariot-less and praised himself so much in front of the lion Lord Krishna of Vrishni dynasty and the great man Arjun, then with the inspiration of Shri Krishna, Kapidhwaja Arjun shot many arrows which had been cleaned on the rock, at Karna, the son of Suta. 110-111 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)