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mahabharat 7.139.101: ‘वृकोदर! तुम फल-मूल खाने और अतिथि-सत्कार करने में समर्थ हो। मैं तुम्हें शस्त्र उठाने के योग्य नहीं समझता।’॥101॥   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  7.139.101 
फलमूलाशने शक्तस्त्वं तथातिथिपूजने।
न त्वां शस्त्रसमुद्योगे योग्यं मन्ये वृकोदर॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
‘वृकोदर! तुम फल-मूल खाने और अतिथि-सत्कार करने में समर्थ हो। मैं तुम्हें शस्त्र उठाने के योग्य नहीं समझता।’॥101॥
 
‘Vrikodara! You are capable of eating fruits and roots and hosting guests. I do not consider you fit to take up arms.’॥ 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)