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mahabharat 7.139.10: अपने शत्रुओं को त्रास देने वाले कर्ण को दो घंटे बाद ही होश आ गया। उस समय उसका पूरा शरीर रक्त से लथपथ था। उस अवस्था में वह अत्यंत क्रोधित हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 7.139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.139.10 
स मुहूर्तात् पुन: संज्ञां लेभे कर्ण: परंतप:।
रुधिरोक्षितसर्वाङ्ग: क्रोधमाहारयत् परम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अपने शत्रुओं को त्रास देने वाले कर्ण को दो घंटे बाद ही होश आ गया। उस समय उसका पूरा शरीर रक्त से लथपथ था। उस अवस्था में वह अत्यंत क्रोधित हो उठा।
 
Karna, who used to torment his enemies, regained consciousness after only two hours. At that time his whole body was soaked in blood. He became very angry in that condition.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)