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mahabharat 7.138.27-29h: हे नरदेव! जिस प्रकार किसी के द्वारा प्रेरित होकर दो हाथी सरकण्डों के वन को रौंद डालते हैं, उसी प्रकार आपकी सेना मेघों के समान अत्यंत दुर्दशाग्रस्त हो गई थी। उसके रथ और ध्वजाएँ छिन्न-भिन्न हो गई थीं। हाथी, घोड़े और सैनिक मारे गए थे। कर्ण और भीमसेन ने उस युद्धभूमि में महान संहार मचाया था। 27-28 1/2।   |   mahabharat अध्याय 7.138: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 138: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध  »  श्लोक 27-29h
 
 
श्लोक  7.138.27-29h 
निपातितध्वजरथं हतवाजिनरद्विपम्॥ २७॥
गजाभ्यां सम्प्रयुक्ताभ्यामासीन्नलवनं यथा।
मेघजालनिभं सैन्यमासीत् तव नराधिप॥ २८॥
विमर्द: कर्णभीमाभ्यामासीच्च परमो रणे।
 
 
अनुवाद
हे नरदेव! जिस प्रकार किसी के द्वारा प्रेरित होकर दो हाथी सरकण्डों के वन को रौंद डालते हैं, उसी प्रकार आपकी सेना मेघों के समान अत्यंत दुर्दशाग्रस्त हो गई थी। उसके रथ और ध्वजाएँ छिन्न-भिन्न हो गई थीं। हाथी, घोड़े और सैनिक मारे गए थे। कर्ण और भीमसेन ने उस युद्धभूमि में महान संहार मचाया था। 27-28 1/2।
 
O lord of men! Just as two elephants inspired by someone trample a forest of reeds, similarly your army was in a very bad condition like a cloud of clouds. Its chariots and flags were torn down. Elephants, horses and men were killed. Karna and Bhimasena had caused great carnage in that battlefield. 27-28 1/2.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भीमकर्णयुद्धे अष्टात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीम और कर्णका युद्धविषयक एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)