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mahabharat 7.138.1: धृतराष्ट्र बोले - सुत संजय! मैं स्वीकार करता हूँ कि इसका कारण मेरा अन्याय ही है। इस समय जब मैं शोक में डूबा हुआ हूँ, मुझे अपने अन्याय का फल प्राप्त हुआ है॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.138: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 138: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.138.1 
धृतराष्ट्र उवाच
महानपनय: सूत ममैवात्र विशेषत:।
स इदानीमनुप्राप्तो मन्ये संजय शोचत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - सुत संजय! मैं स्वीकार करता हूँ कि इसका कारण मेरा अन्याय ही है। इस समय जब मैं शोक में डूबा हुआ हूँ, मुझे अपने अन्याय का फल प्राप्त हुआ है॥1॥
 
Dhritarashtra said - Sut Sanjay! I accept that it is my injustice that is responsible for this. At this time, while I am drowned in grief, I have received the result of my injustice.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)