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श्लोक 7.137.50  |
तन्मा शुचो नरव्याघ्र तवैवापनयो महान्।
विनाशहेतु: पुत्राणां भवानेव मतो मम॥ ५०॥ |
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| अनुवाद |
| अतः हे पुरुषश्रेष्ठ! तुम शोक न करो। तुम्हारा ही महान् अन्याय इसका कारण है। मैं तुम्हें ही अपने पुत्रों के नाश का मुख्य कारण मानता हूँ ॥50॥ |
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| Therefore, O best of men, do not grieve. Your own great injustice is the cause of this. I consider you to be the main reason behind the destruction of your sons. ॥ 50॥ |
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