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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.137.48 
विलपंश्च बहु क्षत्ता शमं नालभत त्वयि।
सपुत्रो भरतश्रेष्ठ तस्य भुङ्क्ष्व फलोदयम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! विदुरजी ने आपके समक्ष बहुत विलाप किया, किन्तु उन्हें शांति की भिक्षा नहीं मिली। यह आपके अन्याय का परिणाम है। अब आपको अपने पुत्रों सहित यह भोगना होगा।
 
O best of the Bharatas! Viduraji mourned a lot in front of you, but he did not receive the alms of peace. This is the result of your injustice. Now you along with your sons must suffer this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)